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जानिए! ग्रहों के गुरू – बृहस्पति ग्रह का आपके जीवन पर प्रभाव! गुरु ग्रह के शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय!

जानिए! ग्रहों के गुरू - बृहस्पति ग्रह का आपके जीवन पर प्रभाव! कैसे बनाएं अपने व्यक्तित्व को आकर्षक, गुरु ग्रह के शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय!

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु यानी बृहस्पति जी को देवगुरु की मान्यता प्राप्त है. सभी ग्रहों में गुरु का स्थान सर्वोच्च है. उनके स्थान को सर्वोपरी स्वीकारते हुए उनकी पूजा अर्चना का प्रावधान है. बृहस्पति को शिरोमणि और सात्विक ग्रह के तौर पर माना गया है. गुरु ग्रह बृहस्पति मनुष्य की जिंदगी पर प्रभावी असर डालता है. जिस किसी की कुंडली में बृहस्पति कमजोर होता है, उसकी जिंदगी परेशानियों से भर जाती है. बृहस्पति ग्रह की विशेषता है कि ये किसी भी अवस्था को विशाल रुप दे देता है. जानकारों का मानना है कि आपकी जिंदगी में घट रही हर बड़ी घटना के पीछे बृहस्पति हो सकता है.

आइए, हम विस्तारपूर्वक चर्चा करते हैं कि किस प्रकार बृहस्पति ग्रह आपके जीवन पर प्रभावी असर डालता है, इसके शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय.

गुरु ग्रह

जन्म कुंडली में देव गुरु वृहस्पति का शुभ-अशुभ प्रभाव

गुरु ग्रह – धन और ज्ञान को करता है नियंत्रित

सभी ग्रहों में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है. इन्हें चिंतन और मंत्रणा का कारक समझा जाता है. इस ग्रह का मानक रंग पीला है. ये ज्ञान और धन से जुड़े मामलों को नियंत्रित करता है. व्यक्ति के जीवन में धन और ज्ञान के महत्व से भला कौन इंकार कर सकता है. ये वही दो कारक है, जो आपको हर तरह की भौतिक सुख सुविधा और समाज में प्रतिष्ठा दिलाता है.

गुरु ग्रह – कानून और धर्म बृहस्पति के अधीन

आपकी तिजोरी में कितना सोना है, ये बृहस्पति के प्रभाव से ही तय होता है. बृहस्पति मजबूत होने से व्यक्ति के पास सोने का भंडार जमा होने लगता है. इसके अलावा कानून, धर्म, मंत्र, संस्कार और अध्यात्म गुरु ग्रह बृहस्पति के अधीन होता है.

गुरु ग्रह – स्वास्थ्य पर डालता है असर

जिन पांच तत्वों से मनुष्य का शरीर बनता है, उनमें से एक आकाश का स्वामी बृहस्पति गुरु को माना जाता है. बृहस्पति के कारण ही वजन घटना और बढ़ता है. ये सीधे सीधे शरीर को प्रभावित करता है. पेट, उम्र और पाचन तंत्र पर सीधे सीधे बृहस्पति का असर होता है. बृहस्पति का प्रभाव इतना विराट होता है कि कन्याओं का विवाह और संतान प्राप्ती की पूरी जिम्मेदारी बृहस्पति के प्रभाव से ही तय होती है.

गुरु ग्रह – सत्य से करते हैं प्रेम

गुरु ग्रह से प्रभावित जातक झूठ से घृणा और सत्य से प्रेम करने वाले होते हैं. धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हैं. अनैतिक कार्यों में लिप्त नहीं होते हैं. सत्य के मार्ग् पर चलने वाले लोगों का साथ देते हैं और उनके लिए संघर्ष करने में भी नहीं हिचकते. विज्ञान और गणित में विशेष रुचि रखते हैं.

गुरु ग्रह

गुरु ग्रह – सद्गुणों का कारक

ज्योतिष शास्त्र के अुनसार बृहस्पति पवित्र और सात्विक ग्रह है. गुरु ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी है और पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद, गुरु के नक्षत्र माने जाते हैं. बृहस्पति ग्रह वर्ष के 12 मास में 04 मास तक वक्री रहता है. यह कुंडली के दूसरे, पांचवें, नौंवे, दसवें और ग्यारहवें भाव का कारक माना जाता है. बुध और शुक्र, गुरु ग्रह बृहस्पति के दुश्मन माने जाते हैं. वहीं सूर्य, चंद्रमा और शनि के साथ इनकी दृष्टि को काफी शुभ माना जाता है. मंगल ग्रह बृहस्पति का मित्र है.

जिन जातकों पर गुरु ग्रह का प्रभाव होता है उनके अंदर करुणा, दया और न्याय जैसे सद्गुण मौजूद होते है. ऐसे लोग किसी भी निर्णय में सिर्फ अपना स्वार्थ नहीं बल्कि सबकी भलाई सोचते हैं.

गुरु ग्रह – इन बीमारियों का खतरा

जो भी लोग गुरु ग्रह से प्रभावित होते हैं, उन्हें कई तरह की बीमारियां होने का खतरा होता है. इनमें कफ जैसी मामूली बीमारियों से लेकर कैंसर जैसी असाध्य बीमारी भी शामिल है. ऐसे लोगों के पेट का भाग बहुत वजनी और आवाज में भी भारीपन पाया जाता है.

जन्म कुंडली में देव गुरु वृहस्पति के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय

बृहस्पति ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए हम यहां कुछ आसान से ज्योतिषीय उपायों की चर्चा कर रहे हैं, जिसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना कर आप अपने जीवन की रक्षा करते हैं. ये उपाय आपके जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन ला सकते हैं.

गुरु ग्रह

  • प्रत्येक गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करें और पूजा करें.
  • एकादशी और गुरुवार को उपवास करें.
  • रोजाना सुबह शाम “ओम बृं बृहस्पतये नमः” का जाप करें.
  • श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. ‘देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसंनिभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥’
  • गुरु बृहस्पति के बीज मन्त्र- बीज मन्त्र-‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:।’
  • प्रातः काल उठाते ही तांबे के बर्तन में जल ग्रहण करें.
  • दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में सोने या पीतल का छल्ला धारण करें.
  • भगवान शंकर की पूजा करें.
  • गुरु को दक्षिणा या भेंट आदि दें
  • सुबह और शाम गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें.
  • गरीब बच्चों को उनका मनपंसद भोजन कराएं.

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