Maharashtra

धार्मिक ग्रंथों पर कोर्ट का फैसला: अब नही हटेंगी गीता, कुरान और बाइबल से GST दरें

मोदी सरकार ने हाल ही में टैक्स हटा कर GST सिस्टम लागु किया था. ऐसे में महाराष्ट्र की कोर्ट ने फैसला लिया है कि अध्यात्मिक पर भी टैक्स लगाया जाएगा. कोर्ट के अनुसार अब धार्मिक ग्रन्थ, मैगजीन और डीवीडी के साथ साथ सभी धर्मशालाएं और लंगर हाल भी जीएसटी के दायरे में आएंगे. कोर्ट ने कहा कि धार्मिक चीज़ों की बिक्री भी एक तरह से कारोबार ही हैं और ऐसे में यह टैक्स मुक्त हो, यह जरूरी नहीं है.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र कोर्ट के पास धार्मिक ग्रंथों पर टैक्स संबंधी यह मामला श्रीमद् राजचंद्र आध्यात्मिक सत्संग साधना केंद्र के खिलाफ दर्ज हुआ था. अब कोर्ट ने संस्था को दलील दी है कि इस संस्था का मुख्य काम धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षा का प्रसार करना है ऐसे में शिक्षा के इस काम को कारोबार की संज्ञा नहीं दी जानी चाहिए. आपको बता दें कि CGST Act के सेक्शन 217 के अनुसार यदि कोई धर्म से जुड़ा ट्रस्ट ऐसे किसी भी काम का सहारा लेता है या सेवा के नाम पर पैसे लेता है तो उसे कारोबार की श्रेणी में रखा जाएगा और उस पर 18 फ़ीसदी की दर से जीएसटी वसूला जाएगा.

GST on religious books

संस्था ने कोर्ट को अपने दायित्व में धार्मिक ग्रंथों DVD और धर्मशाला लंगर आदि को जीएसटी से बाहर रखने का अनुरोध किया था. लेकिन महाराष्ट्र की सरकार ने साफ तौर पर कह दिया है कि यह सभी धार्मिक चीजें टैक्स के सेक्शन 12 AA के तहत रजिस्टर्ड है ऐसे में इन्हें वह चाहकर भी जीएसटी के दायरे से बाहर नहीं रख सकते.

हालांकि एक्ट में जिक्र है कि यदि कोई संस्था ग्रंथ/ किताब/ मैजगीन को किसी पब्लिक लाइब्रेरी के तहत लोगों के उपयोग के लिए रखती है तो ऐसी स्थिति में उसे जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा. परंतु वहीँ अगर कोई इन चीज़ों की बिक्री करेगा तो उसे जीएसटी के सभी कानूनों का पालन करना होगा.

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