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यह व्यक्ति प्लास्टिक से बनाता है सडकें, अभी तक मिल चुका है पद्मश्री अवार्ड

73 वर्षीय राजगोपालन वासुदेवन मदुरै के इंजीनियरिंग कॉलेज में रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफ़ेसर रह चुके हैं. राजगोपालन का नाम आज के समय में भारत देश का बच्चा- बच्चा जानता है. दरअसल, राजगोपालन को प्लास्टिक के कचरे से सडकें बनाने का  हुनुर भगवान ने तोहफे के रूप में दिया है. जिसके चलते हाल ही में इन्हें सरकार  द्वारा पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है. अक्सर आपने बीच सड़कों पर कचरों के ढेर लगे देखे होंगे. ये ढेर ना केवल गंदगी फैलाते हैं बल्कि इंसान की कईं बिमारियों का कारण भी बनते हैं.

लेकिन राजगोपालन वासुदेवन एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने इस कचरे में से ना केवल प्लास्टिक का इस्तेमाल करके पैसे बचाए बल्कि इस प्लास्टिक को उन्होंने जन-जीवन के काम आने लायक बनाया. इंजीनियरिंग कॉलेज (टीसीई), मदुरै में केमिस्ट्री के प्रॉफेसर राजगोपालन वासुदेवन अब इस कचरे के माध्यम से सड़कें बनातें हैं. हालांकि आपको यह सुनने में थोडा अजीब लग रहा होगा लेकिन यह बिलकुल सच है.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि वासुदेवन को भारत का ‘प्लास्टिक मैन’ (Plastic Man of India) कह कर बुलाया जाता है. राजगोपालन के इस अजीबोगरीब इनोवेशन में भारत सरकार भी उनकी मदद के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा दे रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार राजगोपालन प्लास्टिक को गरीब आदमी का सच्चा मित्र मानते आये हैं. अपनी इस खोज के लिए  राजगोपालन को 10 सालों की मेहनत लगी. उन्होंने सबसे पहले 2002 में अपनी तकनीक से थिएगराजार कॉलेज के परिसर में प्लास्टिक कचरे से रोड का निर्माण कराया, इसके बावजूद उन्हें अपनी तकनीक को मान्यता दिलाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.

एक इंटरव्यू के दौरान जब राजगोपालन से सड़कों के लिए प्लास्टिक इस्तेमाल करने के आईडिया के बारे में सवाल किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें प्लास्टिक वेस्ट से सडकें बनाने का आईडिया टीवी कार्यक्रम से मिला था. दरअसल टीवी में एक डॉक्टर ने प्लास्टिक के नुकसानों के बारे में बताया था जिससे सीख लेकर राजगोपालन ने कुछ नया करने की सोची.

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