Festival

Diwali Essay in Hindi: जाने क्यूँ मनाया जाता है ये त्यौहार

Diwali Essay in Hindi: भारत देश त्योहारों का देश है यहां हर साल ढेरों त्योहार मनाए जाते हैं. सभी तोहार अपने आप में विशेष महत्व रखते हैं. वहीँ बात दिवाली की करें तो इस त्यौहार का इंतजार भारतवासी बहुत बेसब्री से करते हैं फिर चाहे वह बूढा  हो या बच्चा, हर कोई इस दिन को लेकर काफी उत्साहित रहता है. यह त्यौहार दशहरे के 21 दिन बाद आता है. बचपन से ही हमें स्कूल में अध्यापक दिवाली के बारे में जानकारी देते आए हैं ताकि हम बच्चे अपने भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ सकें. आज हम आपको दिवाली पर निबंध ( essay on diwali) लिखना सिखा रहे हैं जोकि लगभग हर परीक्षार्थी के काम आ सकते हैं. तो चलिए जानते हैं diwali festival essay क्या है और इसको कैसे लिखा जा सकता है.

दिवाली निबंध 1- diwali essay in english 100 words

भारत देश त्योहारों का देश है और हर साल यहां पर बहुत सारे त्यौहार मनाए जाते हैं और हर त्यौहार कहीं ना कहीं अपने इतिहास के कारण विशेष महत्व रखता है. भारत देश में दिवाली(diwali essay)  का त्योहार बहुत प्रसिद्ध त्यौहार माना जाता है यह तोहार दशहरे के 20 दिन बाद अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है. कहां जाता है कि दीपावली वाले दिन श्री रामचंद्र जी अपने 14 साल का वनवास काट कर अयोध्या वापस लौटे थे जिसके बाद अयोध्या वासियों ने उनके आने की खुशी में दीपमाला की थी और सारे राज्य को रोशनी से नहला दिया था. दीपावली का त्यौहार रोशनी का त्योहार होता है इसलिए लोग अपने घरों में दीपमाला करते हैं. एलइडी लाइट्स के इस दौर में घरों को रोशन करना और भी आसान हो गया है. लोग दीपावली की रात को घर में लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अपने घर के दरवाजे खुले रखते हैं कहा जाता है कि यह लक्ष्मी माता के आने का संकेत होता है.

क्यूंकि लक्ष्मी माँ को सफाई पसंद है और वह साफ़ सुथरे घर में ही प्रवेश करती हैं, इसलिए दीपावली के पहले ही लोग अपने घरों में दफ्तरों में दुकानों में अथवा कार्यालयों में सफाई करना शुरू कर देते हैं . दीपावली वाले दिन बाजारों में मानों जैसे मेला लगा हुआ होता है लोग दीपावली वाले दिन नए नए कपड़े मिठाइयां आदि खरीदते हैं लक्ष्मी पूजा के बाद सारे घर में दिए जलाते हैं और प्रसाद बांटते है. ईश्वर से अपने खुशियों की कामना करते हैं अंत में लोग पटाखे चलाने की मस्ती में डूब जाते हैं.

दिवाली निबंध 2 – short essay on diwali in hindi for class 3

दिवाली का त्यौहार हर साल भारत में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है. दीवाली को दीपों का त्यौहार भी कहा जाता है. इस त्यौहार को हिंदू और सिख मिल कर मनाते हैं. कहा जाता है कि इस दिन श्री राम चंद्र जी 14 वर्षों का बनवास काटने के बाद अयोध्या वापिस लौटे थे जिसके नाद लोगों ने उके स्वागत के लिए आतिशबाजी एवं दीपमाला की थी. इसके इलावा इस दिन सिक्खों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिन्द सिंह जी ग्वालियर के किले से अपने साथ 52 अन्य राजाओं को रिहा करवा कर लौटे थे जीनेक बाद लोगों ने उनका स्वागत आतिशबाजी के साथ किया था. दिवाली आने से पहले ही लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करना शुरू कर देते हैं. कहा जाता है कि लक्ष्मी माँ दिवाली (essay on diwali in hindi)की रात घरों में प्रवेश करती है. इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और मिठाईयां बाँट कर ख़ुशी मनाते हैं. वहीँ बाज़ारों में भी पटाखों की किलकारियां गूंजती सुनाई देती हैं. कुछ लोग इस दिन का जश्न मनाने के लिए जुआ एवं सट्टे खेलते हैं जबकि ऐसा करना पाप माना जाता है.

दिवाली निबंध 3- diwali festival essay/ diwali essay

दिवाली को रौशनी एवं दीयों का त्यौहार भी कहा जाता है. यह हर साल विजयदशमी के 21 दिनों बाद यानी अक्टूबर या नवंबर में मनाया जाता है. दीवली एकमात्र ऐसा त्यौहार है, जिसे सिख, हिंदू, बोध, जैन आदि धर्म मिल कर मनाते हैं. दिवाली को मनाने के पीछे कईं इतिहासिक कारण है जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं. बताया जाता है कि इस दिन हिंदू धर्म के भगवान श्री राम चंद्र जी बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल करके 14 वर्षों बाद सीता माँ के साथ अयोध्या वापिस लौटे थे. इतने लंबे बनवास के बाद उनके लौटने पर अयोध्या वासियों ने जमकर आतिशबाजी और दीपमाला करके उनका स्वागत किया था.

वहीँ इस दिन सिक्खों के छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर के किले से 52 राजाओं के साथ रिहा हो कर वापिस आए थे जिनके आने की ख़ुशी में हर तरफ दीपमाला(diwali essay in hindi) की गयी थी. दिवाली आने से कुछ दिन पहले ही लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करवाना शुरू कर देते हैं. ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी माँ को सफाई पसंद है और दिवाली वाले दिन उनकी सच्चे मन से पूजा करने पर वह घर में प्रवेश करती हैं. ऐसे में कईं लोग रात में अपने घरों के दरवाजे खुले रख कर सोते हैं.

दिवाली बच्चों का ही नहीं बल्कि हर बड़े बजुर्ग का भी सबसे पसंदीदा त्यौहार है. इस दिन सभी लोग मिल कर खुशियाँ मनाते हैं और मिठाईयां बाँट कर अपनी खुशियाँ ज़ाहिर करते हैं. रात में हर घर में दीपमाला की जाती है और जमकर आतिशबाजी की जाती है. अमृतसर की दिवाली सबसे प्रसिद्ध है. हिंदी की एक कहावत के अनुसार ‘दाल रोटी घर की, दिवाली अमृतसर की’ यानी इस दिन अमृतसर की दिवाली का मंजर सबसे हटके होता है. कुछ लोग दिवाली के दिन को जुआ खेल कर या दारु पी कर खराब करते हैं. ऐसे में वह भूल जाते हैं कि दिवाली खुशियों का त्यौहार है जिसे वह बेफालतू जाया कर रहे हैं.

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Close